भारत 15 अगस्त 1947 को आजाद हुआ। आजादी के बाद भारत में अंतरिम सरकार का गठन किया गया। क्या आप इस सरकार के मंत्रियों को जानते हैं? प्रधानमत्री को तो हर कोई जानता है लेकिन अन्य मंत्री कौन थे उन्हें कौन सा मंत्रालय मिला था? यह सरकार कितने दिनों तक रही? इस सरकार का क्यों गठन किया गया? अगर आप तमाम बातों को जानना चाहते हैं तो आप को यह पढ़ना चाहिए।

भारत की पहली सरकार का गठन कब हुआ?
अंग्रेजों ने भारत छोड़ने से पहले ही एक 1946 में एक सरकार का गठन कर दिया था लेकिन इसके अधिकार काफी कम थे। 15 अगस्त 1947 को अंग्रेजो के जाने के बाद पंडित नेहरू के नेतृत्व में भारत में सरकार का गठन किया गया। इस सरकार ने अनेक कार्य किये और फैसले लिये। यह एक तरह से सभी पार्टीयों की सरकार थी। इस सरकार के कैबिनेट में कांग्रेस के अलावा दलों के नेता को भी जगह दी गयी थी।
नेहरू का पहला कैबिनेट
- जवाहर लाल नेहरू– प्रधानमंत्री
- अबुल कलाम आजाद– शिक्षा मंत्री
- राजेंद्र प्रसाद– कृषि मंत्री
- सरदार बलदेव सिंह– रक्षा मंत्री
- जॉन मथाई– रेल मंत्री
- आर के शणमुखम शेट्टी– वित्त मंत्री
- बी आर अंबेडकर– विधि मंत्री
- जगजीवन राम– श्रम मंत्री
- सी एच भाभा– वाणिज्य मंत्री
- राजकुमारी अमृत कौर– स्वास्थ्य मंत्री
- रफी अहमद किदवई– संचार मंत्री
- डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी– उद्योग मंत्री
- वी एन गाडगिल– कार्य खनन एवं उर्जा

पहली सरकार के कुछ प्रमुख काम?
जब देश आजाद हुआ तो देस के उपर कई चुनौतीया थी। अंग्रेजों का मानना था कि भारत के लोग इतने योग्य नहीं हैं कि वो आधुनिक लोकतत्र को अपना पाएंगे। पुरी दुनिया की नजर इस सरकार के उपर थी की किस प्रकार यह देश आगे बढ़ेगा। नेहरू की सरकार ने कुछ काम किये जो निम्नलिखित हैं।
- आजादी के बाद देश का विभाजन हो चुका था। देश में भारी संख्या में पाकिस्तान से लोग आएं थे जिन्हें बसाना एक चुनौती थी। नेहरू की सरकार ने सफलता पुर्वक लोगों को बसाया।
- फरिदाबाद जैसे शहर को बसाया गया और भी कई शहर को बसाया गया।
- संविधान बनाने के कार्य को तेजी से बढ़ाया गया।
- देश में लोकतंत्र को लेकर जनजागरण फैलाया गया।
- देश भर में चल रहे दंगे को रोका गया।
- देश भर में उद्योग धंधों का एक सर्वे करवाया गया।
- 1952 में आम चुनाव करवाने के लिये माहौल तैयार किया गया।
देश की पहली सरकार की कुछ गलत फैसले!
देश में बनी पहली सरकार ने कुछ अच्छे फैसले लिये तो कुछ मुद्दो पर उसकी आलोचना भी की जाती है। सरकार के कुछ फैसले जिन पर समय-समय पर आपत्ती उठाई जाती है।
- भारत की कश्मीर नीति- भारत सरकार के कश्मीर नीति की समय-समय पर खूब आलोचना होती है।
- कश्मीर मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र में लेकर जाने के नेहरू सरकार के फैसले की अब तक आलोचना होती रही है।
- विदेश नीति के मामले में हलांकि नेहरू को दक्ष माना जाता था लेकिन उनके कुछ काम की आज भी आलोचना होती है।
- अंग्रेजो के जाने के बाद भी अंग्रेजी कार्यप्रणाली के कारण भी नेहरू की आलोचना होती रही है।
पहली सरकार के साथ विवाद?
पहली सरकार का गठन काफी पेचीदा काम था इस सरकार में गांधी जी के देंखरेंख में सभी तरह के लोगों को जगह देने का प्रयास किया गया था। इस सरकार में विदेशी ज्ञान से परिपूर्ण नेहरू थे तो राष्ट्रवादी सोच के सरदार पटेल भी थे। अंबेडकर को दलित अधिकारों का रहनुमा माना जाता था। वहीं श्यामा प्रसाद मुखर्जी के रूप उग्र राष्ट्रवादी को भी मंत्रीमंडल में रखा गया था।
- पहले सरकार में सरदार पटेल और नेहरू कई बार आमने-सामने आ गये। कई ऐसे मौके आए जब गांधी जी को बीच बचाव करना पड़ा।
- कश्मीर में सरकार की नीतियों पर सवाल खड़ा करते हुए श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने अपने पद से त्यागपत्र दे दिया था। बाद में कश्मीर में प्रदर्शन करते हुए उनकी मौत हो गयी थी।
- अबंडकर ने भी कई मुद्दो पर काफी मुखरता पुर्वक सरकार का विरोध किया था।
- राष्ट्रपति राजेन्द्र प्रसाद भी अपने धार्मिक सोच के कारण कई मुद्दो पर असहज रहे। कई मुद्दो पर तो उनकी पंडित नेहरू से इस मुद्दो पर काफी मत भिन्नता रही।
तामम परेशानी और विवादों को झेलते हुए इस सरकार ने अपना कार्यकाल पूरा किया और देश में पहली आम चुनाव को सफलता पूर्वक आयोजन किया गया।